लोग क्या कहते हैं
या नहीं कहते हैं।
अपनेपन के दिये तो बुझ गए
बस बस रिश्तो का बंधन है।।
अब किसी के होने
या ना होने से
मुझे कोई दरकार नहीं।
अनचाहे लोग मेरी कोई सरकार नहीं।।
अकेला ही आता है दुनिया में सब
अकेला ही जाता है दुनिया में सब।
फिर क्यों किसी के
साथ होने की ख्वाहिश रहे
तन्हा होना...
खुद के ना होने से तो अच्छा है।।
अब ना किसी से कोई आस है
अपना तो बस सारा आसमान है।
उड़ना है सपनों के संग
सारा आसमां नप जाना है।।
अब ना गिरने का होगा डर
अब ना टूटने का होगा दौर।
अब हर किस्सा पुराना है
नया दौर का यह जमाना है।।
जो बीता है सो रीता है
आने वाला कल तो गीता है।
अब मुझे फर्क नहीं पड़ता
लोग करता कहते हैं।।
~रश्मि
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